अमावस्या पर अपने पूर्वजों की स्मृति में करें भोजनदान या भंडारा
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अमावस्या पर अपने पूर्वजों की स्मृति करे
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क्या हम इंसान है???
हम कौनसी कुम्भकरणी नींद में सो रहे है??
क्या हम हमारी लाखों वर्ष पुरानी संस्कृति में मानव सेवा और परमार्थ धर्म भूल गए हैं?????
विचार कीजिये साहब ….पीड़ित,गरीब,रोगी ओर दुःखी जनों के दुखों पर।।।।
सर्वे भवन्तु सुखिनः” की संस्कृति हमे विरासत में मिली लेकिन हम मानव होकर भी संस्कार भूल गए। कितनी गलत बात है।
कोई बात नहीं आज विस्मृति को स्मृति में लाये। आज से समाज मे पुनः “सर्वे भवन्तु सुखिनः “की उक्ति को जागृत कर दें। समय बहुत बदल रहा है अगर हम समाज के लिये आगे नही आये तो दूसरा कौन आएगा???
गरीबी,निरक्षरता,भुखमरी,बेरोजगारी,बालविवाह,प्रदूषण और स्वास्थ्य जैसे विषय और कष्टकारी दृश्य जैसे वृद्ध विधवाओं का बदहाल शरीर,भूखें लोग-अनाथ बच्चे बच्चियां,फुटपाथ पर सो रहे बच्चे बूढ़े,आत्म हत्या करते युवा और किसान,कुपोषण के शिकार गरीब ग्रामीण बच्चे ,रोटी के मोहताज असहाय और बलात्कारी घटनाये, वृद्ध माता पिता को घर से निकालना जैसे सेकड़ो कृत्य हमारी समाज के लिये चिंता के विषय है। कैंसर रोग की तरह है।
समाज को उपरोक्त तकलीफों से मुक्त कराना है। आपके सहयोग से ही सम्भव है। कृपया मदद करें।
समाज उत्थान और कल्याण के प्रकल्पों में अपनी सहभागिता प्रदान करें। हमे आपके सहयोग की नितांत आवश्यकता है।।।
UPKAR SANSTHAN TRUST
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